नमस्कार
मैं हूँ हिमांशु और आप पढ़ रहे है मेरा ब्लॉग बिहारी बाबू , अच्छा लगे पढ़ के तो शेयर कर दें और फॉलो भी कर लें।
चुनाव का समय है माहौल हर तरफ का गरमाया हुआ है , नेता सब की संख्या में सीधा 100% की वृद्धि हो चुकी है और साथ ही राजनीति से पीएचडी करने वाले की संख्या में भी बहुत ज्यादा वृद्धि देखी गई है। मतलब अभी जहाँ भी खड़े हो जाइए चाह वो चाय दुकान हो या कहीं रास्ते का चोवटिया हो या फिर वो किसी नाई का दुकान हो हर जगह लोग चुनाव पर और वोट किसको करें इसपर चर्चा करते दिख जायेंगे। मैं तो कहता हूँ की अगर आपको राजनीति से पीएचडी करना है तो इस समय आप घर से बाहर ही विचरण करते रहिये आपके ज्ञान में बढ़ोतरी जरूर होगा।
भाई चर्चा तो जरूर होती है चुनाव पर लेकिन उस चर्चे में विषय क्या रहता है ? क्या वो विषय होता है जो होना चाहिये ? मतलब कहने का ये है की जिस मुद्दे से हमारा भला हो वो मुद्दा होता है चर्चा का या फिर वहीं मुद्दा की बीजेपी अच्छी है कांग्रेस खराब है या कांग्रेस अच्छी है बीजेपी खराब है। भाई मैं बस इतना कहना चाह रहा हूँ की क्या युवा शिक्षा और रोजगार पर बहस करते है की इन पाँच सालों में इसके लिये क्या किया गया ? क्या किसान इस मुद्दे पर चर्चा करते है की कृषि के लिये क्या किया गया ? क्या महिलाएँ इस मुद्दे पर अपनी बात रखती है की उनके सुरक्षा और सम्मान के लिये क्या किया गया ?
हमलोग बहस करते है की बीजेपी हिंदुओं की बात करती है इसीलिए वो अच्छी है , कांग्रेस मुस्लिमों की बात करती है तो वो उनके लिये अच्छी है। हमारे बहस का मुद्दा हिन्दू मुस्लिम का होता है ...राम मंदीर और बाबरी मस्जिद का होता है ...पार्टी के खराबी और अच्छाई पर होता है। लेकिन हम शिक्षा -रोजगार -कृषि पर बात नही करते है , जो हमसे वोट मांगने आते है उनसे इन सब मुद्दों पर प्रश्न नही करते है।
अच्छा एक बात बताइए की क्या मोदी या राहुल गाँधी हमारे प्रतिनिधि बनेंगे ? क्या वो हमारी समस्याओं को देखने आएँगे ? क्या वो हमसे बातें करेंगे ? नही ना ये सब काम वो करेंगे जिनको आप अपने क्षेत्र से सांसद बनाकर दिल्ली भेजेंगे , यही जनप्रतिनिधि आपके बातों को आपके समस्याओं को वहाँ मोदी और राहुल तक पहुंचाएंगे। तो हमें कैसा प्रतिनिधि चुनना चाहिये ? किसे वोट करना चाहिये ....ये अभी भी लिखना पड़ेगा क्या ?
धन्यवाद
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चुनाव का समय है माहौल हर तरफ का गरमाया हुआ है , नेता सब की संख्या में सीधा 100% की वृद्धि हो चुकी है और साथ ही राजनीति से पीएचडी करने वाले की संख्या में भी बहुत ज्यादा वृद्धि देखी गई है। मतलब अभी जहाँ भी खड़े हो जाइए चाह वो चाय दुकान हो या कहीं रास्ते का चोवटिया हो या फिर वो किसी नाई का दुकान हो हर जगह लोग चुनाव पर और वोट किसको करें इसपर चर्चा करते दिख जायेंगे। मैं तो कहता हूँ की अगर आपको राजनीति से पीएचडी करना है तो इस समय आप घर से बाहर ही विचरण करते रहिये आपके ज्ञान में बढ़ोतरी जरूर होगा।
भाई चर्चा तो जरूर होती है चुनाव पर लेकिन उस चर्चे में विषय क्या रहता है ? क्या वो विषय होता है जो होना चाहिये ? मतलब कहने का ये है की जिस मुद्दे से हमारा भला हो वो मुद्दा होता है चर्चा का या फिर वहीं मुद्दा की बीजेपी अच्छी है कांग्रेस खराब है या कांग्रेस अच्छी है बीजेपी खराब है। भाई मैं बस इतना कहना चाह रहा हूँ की क्या युवा शिक्षा और रोजगार पर बहस करते है की इन पाँच सालों में इसके लिये क्या किया गया ? क्या किसान इस मुद्दे पर चर्चा करते है की कृषि के लिये क्या किया गया ? क्या महिलाएँ इस मुद्दे पर अपनी बात रखती है की उनके सुरक्षा और सम्मान के लिये क्या किया गया ?
हमलोग बहस करते है की बीजेपी हिंदुओं की बात करती है इसीलिए वो अच्छी है , कांग्रेस मुस्लिमों की बात करती है तो वो उनके लिये अच्छी है। हमारे बहस का मुद्दा हिन्दू मुस्लिम का होता है ...राम मंदीर और बाबरी मस्जिद का होता है ...पार्टी के खराबी और अच्छाई पर होता है। लेकिन हम शिक्षा -रोजगार -कृषि पर बात नही करते है , जो हमसे वोट मांगने आते है उनसे इन सब मुद्दों पर प्रश्न नही करते है।
अच्छा एक बात बताइए की क्या मोदी या राहुल गाँधी हमारे प्रतिनिधि बनेंगे ? क्या वो हमारी समस्याओं को देखने आएँगे ? क्या वो हमसे बातें करेंगे ? नही ना ये सब काम वो करेंगे जिनको आप अपने क्षेत्र से सांसद बनाकर दिल्ली भेजेंगे , यही जनप्रतिनिधि आपके बातों को आपके समस्याओं को वहाँ मोदी और राहुल तक पहुंचाएंगे। तो हमें कैसा प्रतिनिधि चुनना चाहिये ? किसे वोट करना चाहिये ....ये अभी भी लिखना पड़ेगा क्या ?
धन्यवाद
वोट किसको करें ?
Reviewed by मेरी डायरी : हिमांशु
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Monday, April 15, 2019
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