हमारे देश में आरक्षण का मुद्दा समय समय पर उठता आया है , ऐसे में एक बार फिर केन्द्र सरकार द्वारा सवर्णों को आरक्षण को लेकर इस पर हर जगह बहस शुरू हो चुका है।कोई सही तो कोई इसे गलत ठहरा रहे है ,कोई पॉलिटिकल स्टंट तो कोई इसे सबका साथ सबका विकास बता रहे है।अब हम इसपर बात नही करेंगे हम बात करेंगे बेरोज़गारी की ,नौकरी की , अगर नौकरी नही आयेगी तो ये आरक्षण किसी के लिये भी लाभदायक नही हो सकता है।
दोस्तों आप सब को पता है की आजादी के बाद से ही भारत में बेरोज़गारी एक प्रमुख समस्या रही है जो अब एक बहूत बड़ी समस्या बन चुकी है।अब कैसे ? इसे समझते है हाल ही में सीएमआईई की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है की देश में बेरोज़गारी का दर 27 महीनों में सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँच गया है।विश्व बैंक का इस संदर्भ में कहना है की अगर भारत को बेरोज़गारी पर काबू पाना है तो इसके लिये भारत को हार वर्ष 81 लाख नौकरियाँ सृजित करना होगा।देश में पढ़े -लिखे लोग भी बेरोजगार बैठे है जो सबसे बड़ी चिंता का विषय है , देश के एक प्रसिद्ध विश्विद्यालय द्वारा किये गये शोध से ये पता चला है की देश में स्नातक डिग्री धारक की दर ईन 5-6 सालों में 4.1% से बढ़कर 8.4% तक पहुँच गई है।2018 में जहाँ भारत में 1.86 करोड़ अनुमानित बेरोजगार थे वही 2019 में 30000 और बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है।13.19 लाख नौकरी लायक लोग हार साल देश में बढ़ रहे है और इस हिसाब से नौकरियाँ नही आ रही है , और यही समस्या का कारण है।
दोस्तों आप सब सोच सकते है की देश में बेरोज़गारी कितनी बड़ी समस्या बनती जा रही है ,जिससे निपटना हम सब के लिये और वर्तमान सरकार के लिये भी कोई चुनौती से कम नही है।अब हम आपको विभिन्न सरकारी विभागों , सेंट्रल और कुछ राज्यों में खाली पदों के बारे में एक संक्षिप्त विवरण रख रहे है -
4,12,752 पद खाली है केन्द्र सरकार में और ये आंकड़े 1 मार्च 2016 तक के है।
ग्रुप -A के 15,284 पद खाली है जिसकी नियुक्ति upsc के द्वारा किया जाता है।
ग्रुप -B (राजपत्रित ) के 26,310 और ग्रूप -B (अराजपत्रित ) के 49,740 पद खाली है।
ग्रूप -C का विभिन्न विभागों में लगभग 3,21,412 पद खाली है।
ये सारी डाटा विभिन्न समाचार पत्रों और सरकार वेबसाइट्स से निकाला गया है जिससे साफ जाहिर हो रहा है की लाखो पदों पर नियुक्तियां होनी है लेकिन सरकार के ढीलेपन से ये खाली पड़ा हुआ है।अगर इन पदों पर बहाली प्रक्रिया शुरू हो तो निश्चित रुप से बेरोज़गारी के दर में गिरावट होगा , हाँ ख़त्म फिर भी नही होगा लेकिन कम जरुर हो सकता है।
दोस्तों अब अगर राज्यों की बात किया जाय तो दिल्ली में करीब 60-70 हजार पदों पर बहाली रुकी हुई है तो वही बिहार में लगभग विभिन्न विभागों में 1 लाख पदों पर बहाली होनी है।ऐसे ही लगभग सभी राज्यों में हजारों -लाखो की संख्या में विभिन्न विभागों में पद खाली है और नियुक्ति की बाट जोह रहे है।अब आपको ही बताना है की अभी सरकार की प्रथम प्राथमिकता क्या होनी चाहिये ??
देशभर में कई विभागों में तो लाखों की संख्या में पद खाली पड़े है ,शिक्षा विभाग में जहाँ 10 लाख शिक्षकों की आवश्यकता है वहीँ 1,50,000 पद स्वास्थ विभाग में खाली है।अगर डाक विभाग की बात किया जाय तो 54000 पदों पर बहाली होनी है ,वहीँ पुलिस विभाग में 4.4 लाख सशस्त्र पुलिस बल तो 90000 के करीब पुलिस कर्मियों की ज़रूरत है।
ऐसे में आपको नही लगता की पहली प्राथमिकता नौकरियाँ सृजित करना होना चाहिये , आरक्षण सही है या गलत इसपर बाद में बहस कर लेंगे लेकिन पहले बेरोजगारों को रोजगार देने पर बात होनी चाहिये।चुनाव नज़दीक आने पर भाजपा का ये झुनझुना कितना काम आयेगा ये अब देखने वाली बाट है ,लेकिन भाईयो नौकरियों पर पहले बात करो।अगर नौकरियां ही नही आयेगा तो इस झुनझुने का क्या होगा ,युवाओं को पहले नौकरियाँ मांगनी चाहिये जो वादा भी मोदी जी ने किया था की प्रत्येक वर्ष दो करोड़ रोजगार दूँगा।
दोस्तों कैसा लगा आर्टिकल कॉमेंट में जरुर बातायें ,कोई सुझाव हो तो जरूर लिखें और इसे शेयर भी कर दीजियेगा अगर अच्छा लगे तो बहूत जल्द हम इसकी अगली कड़ी लेकर आयेंगे जिसमे आरक्षण पर बात करेंगे।।
पहली प्राथमिकता आरक्षण या बेरोजगारी
Reviewed by मेरी डायरी : हिमांशु
on
Sunday, February 03, 2019
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